मुख्य सचिव ने कहा शासनादेश का आशय भविष्य में रिक्त होने वाले पदों से है
देहरादून। सरकारी विभागों में आउटसोर्स, संविदा, दैनिक वेतन, वर्कचार्ज कार्यप्रभरित, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ कर्मचारियों की भर्ती पर रोक से, इस तरह की सेवा शर्तों के तहत पहले से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मुख्यसचिव आनंद वर्द्धन ने स्पष्ट किया है कि, इस रोक का आशय मात्र भविष्य में होने वाली भर्तियों से है।
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा है कि सरकारी विभागों में आउटसोर्स, संविदा, दैनिक वेतन, वर्कचार्ज कार्यप्रभरित, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ कर्मचारियों की भर्ती पर रोक संबंधित ताजा शासनादेश का, इस तरह की व्यवस्था के तहत पहले से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उक्त शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि, भविष्य में रिक्त पदों पर अब मात्र नियमित भर्तियां ही की जाएंगी। मुख्य सचिव ने कहा कि कोई भी शासनादेश पिछली तिथि से लागू नहीं होता, इस कारण इस शासनादेश का असर भी आगामी भतिर्यों पर होगा, पहले से कार्यरत कर्मचारी इससे प्रभावित नहीं होंगे। सभी विभाग इसी क्रम में शासनादेश का पालन सुनिश्चित करेंगे।
शनिवार को जारी हुआ था शासनादेश
गौरतलब है कि नई भर्ती को लेकर शनिवार को शासनादेश जारी किया गया था। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से सभी प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारियों को रोक संबंधी आदेश जारी किया गया। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद चतुर्थ श्रेणी के पदों को समाप्त किया गया था, जिसकी जरूरत पूरी करने के लिए आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी तैनात किए जाते रहे हैं। विभागों में नियमित भर्तियों में होने वाले विलंब के चलते भी आउटसोर्स-संविदा भर्तियों को बढ़ावा मिला।
27 अप्रैल 2018 और 29 अक्तूबर 2021 को शासनादेश जारी करते हुए शासकीय कार्य के सरलीकरण, मितव्ययता लाने का मकसद था। लेकिन कई विभागों में नियमित चयन होने के बावजूद इन पदों के सापेक्ष तैनात आउटसोर्स कर्मचारी न्यायालयों से स्टे आर्डर ले आए। इस कारण नियमित कर्मचारी तैनात करने में परेशानी हो रही है। न्यायालयों की अवमानना की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे असमंजस की स्थिति है। आउटसोर्स, संविदा कर्मचारी नियमितिकरण की मांग को लेकर न्यायालयों में वाद दायर कर रहे है.
लिहाजा तय किया गया है कि पूर्व के शासनादेश अब संशोधित समझे जाएंगे। किसी भी विभाग में नियमित रिक्त पदों के सापेक्ष संविदा, आउटसोर्स या अन्य इस तरह की कोई भर्ती पूर्णरूप से प्रतिबंधित रहेगी। रिक्त नियमित पदों पर नई भर्तियों के लिए संबंधित चयन आयोग को अधियाचन भेजने होंगे। अगर किसी अधिकारी ने संविदा-आउटसोर्स भर्तियां कीं तो इसे उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानते हुए अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभागाध्यक्ष नियमित पदों की सभी रिक्तियों का आकलन करते हुए भर्ती का अधियाचन समय पर चयन आयोग को भेजें। समय से भर्ती के लिए संबंधित आयोग से समन्वय स्थापित करें। इसकी नियमित रूप से समीक्षा भी की जाएगी।