कांग्रेस ने उप चुनावों के नतीजों के बाद बनाया राज्य मे बदलाव का वातावरण
यात्रा डायवर्ट, क्षेत्रवाद, केदारघाटी के विकास जैसे मुद्दे खूब उछले सर्द हवाओं मे
खुद कमान संभाल कर अग्रिम मोर्चे पर डटे धामी ने दिखाया रणनीतिक कौशल
शुरुआती हवा बनाने मे सफल रही कांग्रेस का आखिर मे बिखर गया तिलिस्म
देहरादून। अब केदारनाथ उप चुनाव का नतीजा घोषित हो गया है और इस पर सियासी मंथन भी होगा, लेकिन प्रचार अभियान के आखिर तक यह मुकाबला सीएम पुष्कर सिंह धामी बनाम अन्य तक सिमट गया। नतीजा मुकाबला पीएम मोदी के द्वारा केदार घाटी से लगाव और सीएम धामी की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया। केदारघाटी मे यात्रा डायवर्ट, क्षेत्रवाद, केदारघाटी के विकास जैसे मुद्दे खूब चर्चा मे आये, लेकिन सीएम पुष्कर सिंह धामी ने न केवल सभी सवालों का खुले मंच से जवाब दिया, बल्कि कड़ा पलटवार भी किया। उल्टे कई सवाल दागे और धीरे धीरे सियासी फिजा बदलती रही। कांग्रेस नेता हरीश रावत के अलावा प्रत्याशी मनोज रावत तो यहां तक कह गए कि यह मुकाबला उनके और भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल के बीच नहीं बल्कि ‘धाम’ और ‘धामी’ के बीच है।
पुष्कर सिंह धामी की रणनीतिक कौशल की परीक्षा भी कसौटी पर थी तो उन्होंने सहजता से स्थितियों को भांपकर आम जन को टटोलने की कोशिश की। पीएम मोदी के केदारघाटी मे लगाव को उन्होंने कांग्रेस के अन्य पीएम से तुलना कर जोडा और बताया कि मोदी के लिए कैसे अहम है बाबा केदारनाथ। मोदी 9 बार केदारनाथ आ चुके है जबकि कांग्रेस के किसी पीएम के लिए अवसर नही बन पाया। कैसे लाखों करोड़ की योजनाएँ केदारघाटी मे संचालित हो रही है और और आगामी दशक के केदारघाटी की तस्वीर क्या होगी।
धामी ने लोगों की नाराजगी को सुना और पूर्व मे हुई गलतियों को सुधारने के लिए हक हकूक धारियों, डंडी कंडी घोड़ा खच्चर संचालकों को आश्वस्त किया कि भविष्य मे उनकी सहमति से कार्य योजनाएं धरातल पर उतरेगी। वहीं केदारशिला के दिल्ली ले जाने जैसे आरोप पर फैसला बाबा केदार पर छोड़ दिया।
इसके अलावा विपक्ष की ओर से इस बात को जोर शोर से उठाया गया कि यह चुनाव राज्य मे बड़े बदलाव को ला सकता है। उन्होंने भाजपा मे ही एक धड़े का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी पूरी कोशिश है कि मंगलौर, बद्रीनाथ की पटकथा केदारनाथ मे भी लिखी जाए। कांग्रेस नेताओं के भाषण, नारे और पोस्टर की स्क्रिप्ट इसी ओर इशारा करते रहे। लेकिन धामी ने सबसे पहले असंतुष्ट दावेदारों का रुख कर संगठन के साथ बेहतर तालमेल, कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू किया और फिर आक्रामक बैटिंग की। केदारनाथ मे चल रही योजनाओं के जानकारी के साथ नये विकास का खाका जनता के सामने रखा। जनता ने भी सीएम धामी के वायदे पर भरोसा किया और आखिरकार कांग्रेस को सटीक रणनीति के आगे पस्त होना पड़ा।
दूसरी ओर प्रत्याशी चयन मे उलझी कांग्रेस ने शुरू मे मुद्दों की बरसात कर भाजपा को असहज कर दिया था, लेकिन सांगठनिक कमजोरी, बड़े नेताओं मे सामंजस्य का अभाव तथा कई आरोपों के बाद खुद घिरती नजर आयी कांग्रेस मतदान के नजदीक आने तक शुरुआती प्रदर्शन बरकरार नही रख पायी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत तमाम नेता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर हमलावर रहे। वह राज्य की राजनीति मे बदलाव के लिए और सरकार पर अंकुश के लिए जरूरी बताते रहे। बेरोजगारी और अनियमितताओं के लिए भी वह धामी को कोसते नजर आये जबकि प्रत्याशी को लेकर कुछ बोल नही फूटे।
बहरहाल भाजपा को मिली यह विशेषकर सीएम धामी के लिए अहम है क्योकि धामी बनाम कांग्रेस के बीच सिमटे इस मुकाबले के परिणाम से सर्वाधिक प्रभावित होने के लिए विरोधी सीएम को ही प्रचारित करते रहे। कमान संभालने के बाद धामी ने दो बार राज्य मे सरकार लौटाने का ऐतिहासिक कारनामा, रिकार्ड मतो से सभी उप चुनाव और लोक सभा की पांचों सीटें जीतकर राज्य तथा हाईकमान की वाहवाही लूटी थी। लेकिन हाल ही मे हुए दो उप चुनाव मे मिली हार के बाद विरोधी दबी जुबांन सवाल उठाने लगे थे। अब धामी को विरोधियों के सिर उठाने से भी राहत मिलेगी।